आज एक समाचार देखा कि इंडिगो के पायलट पर ट्रेनी पायलट ने 'मोदी एक्ट' लगवा दिया क्योंकि उसे 'नॉट फिट टू फ्लाई' कहा गया था। ये तो चलिए बाहर आ रहा है हर दिन, पर एक ज्वालामुखी जो मोदी और भाजपा ने सरकारी कार्यालयों में बो रखा है, उसकी स्थिति और विकट है।
मोदी जी के प्रियजन ना काम करते हैं, हल्ला खूब मचाते हैं, समय से आने-जाने पर भी बहुत अधिक रोक आदि नहीं है, प्रमोशन भी समय से पहले इनका ही हों है, तो उनको बस एक काम ही बचता है: मोदी एक्ट लगा कर अपने विरोधियों (जिसे वो ऐसा मानते हैं) को नौकरी से निकलवाना या सस्पेंड करवा कर प्रताड़ित करना।
जब इंडिगो जैसी घटनाएँ होती हैं, तो स्पष्ट संदेश यह जाता है कि मोदी एक्ट लाभार्थियों को नौकरी पर रखने से पहले १० बार सोचो कि कार्यालय में ये क्या-क्या करेंगे। पौने तीन लाख केस पेंडिंग हैं इस एक्ट में। हज़ारों करोड़ कंपनसेशन दिया जा चुका है।
मोदी अपनी बंसी बजा रहा है:
मोदीया की बंशी पुकारे दलित नाम,
पीड़ित का भी काम करूँ, शोषित का भी काम!
मोदीया की बंशी को बजने से काम
वंचित का भी नाम मैं लूँ, दलित का भी नाम!