मैं अरब हूँ। मैं मुसलमान हूँ। मैं अमीराती हूँ। 🇦🇪
और मैं भारत से प्रेम करता हूँ। 🇮🇳 मुझे उस भारत से प्रेम है जिसने मानवता को उपनिषद और भगवद्गीता, रामायण और महाभारत जैसे महान ग्रंथ दिए; उस भारत से, जिसने आत्मा, कर्तव्य, काल और अनंतता पर उस समय चिंतन किया था, जब हमारी आधुनिक दुनिया ने ऐसे प्रश्नों को “दर्शन” कहना भी नहीं सीखा था।
मुझे नालंदा और सिंधु घाटी का भारत प्रिय है; संस्कृत और तमिल का भारत, गणित और खगोलशास्त्र का भारत; वह भारत, जहाँ मंदिर मानो पत्थरों पर उकेरी गई कविताएँ हों, और जहाँ कहानियाँ दादा-दादी और नाना-नानी से बच्चों तक पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रहती हैं।
मुझे उस भारत से प्रेम है जहाँ हिमालय बादलों को छूता है, केरल मानसून को अपने भीतर समेट लेता है, राजस्थान रेगिस्तान को रंगों में बदल देता है, और जहाँ हज़ारों भाषाएँ आज भी अपने-अपने अंदाज़ में एक ही बात कहती हैं: यह मेरा घर है।
और मुझे भारत की सादगी में छिपी खुशियाँ भी उतनी ही प्रिय हैं: मसाला डोसा और सांभर, इडली, पनीर, दाल, बिरयानी और चाय।
क्योंकि भारत हज़ारों वर्षों का इतिहास केले के एक पत्ते पर परोसकर भी मुस्कुराते हुए पूछ सकता है: थोड़ा और लेंगे?
शायद इसीलिए, एक अमीराती होने के नाते, भारत मुझे कभी पूरी तरह पराया नहीं लगता।
सदियों से हमारे पूर्वज उसी हिंद महासागर के आर-पार एक-दूसरे की ओर देखते आए हैं। हमारे खाड़ी तटों से मोती भारत की ओर जाते थे, और हवाएँ वहाँ से मसाले, कपड़े, विचार और कहानियाँ लेकर हमारे तटों पर लौटती थीं।
अरब और भारत के बीच का समुद्र कभी दूरी नहीं था।
वह एक संवाद था।
बहुत कम राष्ट्रों को इतनी प्राचीन सभ्यता विरासत में मिली है, जो आज भी इतनी जीवंत हो।
साम्राज्य मिट गए।
सदियाँ गुज़र गईं।
सरहदें बदल गईं।
लेकिन भारत अपनी कहानियाँ सुनाता रहा।
उसकी प्रार्थनाओं ने भाषाएँ बदलीं।
उसके व्यंजन पीढ़ियों का सफ़र करते रहे।
उसकी पुस्तकों ने राजवंशों को जाते देखा और स्वयं जीवित रहीं।
उसके दर्शन ने सहस्राब्दियों को पार कर लिया।
और फिर भी, हज़ारों वर्षों के बाद, हर सुबह भारत जागता है और आज भी उतना ही विशिष्ट, उतना ही जीवंत, उतना ही भारत है।
शायद यही भारत का सबसे बड़ा चमत्कार है।
कुछ देशों के पास इतिहास होता है।
भारत की धड़कनों में सभ्यता बसती है।
एक अमीराती दिल से,
सम्मान, प्रशंसा और प्रेम के साथ। 🇦🇪❤️🇮🇳