Bureau Chief Haryana @HT Chandigarh @httweets, @HTPunjab-usual caveats apply

Chandigarh, India
Maha Saptami Puja, 2026 at Belur Math. Sad to hear about the stampede in Kolkata pandal.
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When kids of lower middle class and poorest of the poor get chance to learn French in select Haryana govt schools.
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When kids of lower middle class and poorest of the poor get chance to learn French in select Haryana govt schools.
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A wildlife researcher in the Himalayan foothills watched a snow leopard mother leave behind her cub, its leg caught in a poacher’s snare. What happened over the following months became a story he will never forget.
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Interesting and incisive
Britain built India's administration with young recruits to rule it, and never tried it at home. Western democracies front-load their public services with the experienced. India's accident is a resource. It has never been used on purpose. Read my article 👇
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आराम का असली अहसास दर्द के बाद ही होता है। जब तक कष्ट नहीं होता, सुकून बस एक सामान्य अवस्था लगती है; दर्द के बाद वही अवस्था राहत बन जाती है। यह बात मनोविज्ञान और अनुभव दोनों में सच है। मन चीज़ों को निरपेक्ष नहीं, अंतर से नापता है। जो हमेशा से सहज है, वह ध्यान में नहीं आता। जब दर्द, थकान, बेचैनी या तनाव आता है और फिर हटता है, तब शरीर और मन दोनों उस अंतर को तेज़ी से पकड़ते हैं। बुखार उतरने के बाद की नींद, लंबी बीमारी के बाद की पहली आसान साँस, भारी काम के बाद की ख़ामोशी — ये आराम इसलिए गहरा लगता है क्योंकि उससे ठीक पहले उसका अभाव था। दर्शन में भी यही सूत्र बार-बार आता है। बुद्ध ने दुख को जीवन की मूल स्थिति माना, और शांति को उसके पार जाने की अवस्था। गीता में भी सुख-दुख को आने-जाने वाली लहरें कहा गया है; जो व्यक्ति दोनों को समान देखना सीखता है, वही स्थिर रहता है। स्टोइक विचार भी यही कहता है कि कठिनाई सहने के बाद ही व्यक्ति जान पाता है कि मानसिक शांति क्या चीज़ है। दर्द यहाँ सज़ा नहीं, पैमाना है। रोजमर्रा में यह कई रूपों में दिखता है। प्यास लगने के बाद पानी का पहला घूँट, रात भर जागने के बाद की नींद, किसी रिश्ते में टूटन के बाद मिली समझ — सबमें आराम दर्द की स्मृति से तीखा हो जाता है। गाँव की ज़िंदगी में यह और साफ़ है: दिन भर खेत या धूप में रहने के बाद पेड़ की छाया या तालाब का पानी सिर्फ़ ठंडक नहीं, पूरे दिन का इनाम लगता है। एक सीमा भी है। हर आराम के लिए दर्द ज़रूरी नहीं। जो व्यक्ति सजग है, वह बिना बड़े कष्ट के भी साँस, स्वास्थ्य और साधारण दिन की क़ीमत पहचान सकता है। फिर भी यह वाक्य उस अनुभव को ठीक पकड़ता है जो ज़्यादातर लोग जीते हैं: सुकून अक्सर तब शब्द बनता है, जब उससे पहले बेचैनी रही हो। दर्द सिखाता है कि आराम क्या है; आराम याद दिलाता है कि दर्द हमेशा नहीं रहता।
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Brilliant lines here. For anyone and everyone
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🌺 Sri Ramakrishna, Sri Ma Sarada Devi, Swami Vivekananda, and Swami Brahmananda at Belur Math on 4 October 2026, Swami Abhedananda Jayanti 🌸 #BelurMath #SriRamakrishna #SaradaDevi #SwamiVivekananda #SwamiBrahmananda #RamakrishnaMission
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जय जगन्नाथ!🙏 आज रविवार दिनांक 04 अक्टूबर को श्री जगन्नाथ मंदिर में पतित-पावन के दर्शन करें।
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Jai ho Lingraj maharaj (Bhuvneshwar)
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सत तप दया दान...🚩 समझिए आसान भाषा में..💯
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New plan to combat spread of drugs menace in Haryana
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बद्रीनाथ धाम में संगीत समारोह ( DJ concert) को अनुमति प्रदान करना ना केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उन्लंघन है अपितु धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात है। आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी द्वारा इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण मे शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी उल्लेखनीय है की इस स्थान पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे है साँथ में इतनी ऊचाई पर हजारों लोगो के नाचने से उनके स्वास्थ पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृती के रूप में परिणीत किया जा रहा है। मैं भारतीय संस्कृति के अनुयायीयों तथा विशेषकर पूजनीय शंकराचार्यों तथा महात्माओं से यह अनुरोध करता हूँ कि वह संस्कृति के इस क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी आवाज उठाये, मैं केंद्र एवं राज्य सरकार से भी आग्रह करूँगा कि वह ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगा कर देवभूमि की मर्यादा को बनाये रखें, हिमालय देवात्मा है भगवान शंकर का निवास माँ गंगा का उद्गम है इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ो भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।
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How can persons who are slaves of their senses expect happiness? Happiness comes in the state of perfect freedom, and not in slavery; that freedom again can be acquired only through the practice of self-control. SWAMI ABHEDANANDA
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At 9, he has memorised the Bhagavad Gita, learnt 4,000 sutras of Panini’s Ashtadhyayi, speaks multiple languages, and even built his own app. Ancient wisdom. Young minds. New-age technology. Throw this on face of Kejriwal and Rahul Gandhi
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