तथ्य-
१- अंकिता भंडारी मामले में दुष्यंत गौतम का नाम अधिकारिक तौर पर कहीं नहीं आया है
२- न किसी जांच में और न ही किसी गवाह के द्वारा
३- एक भाजपा नेता की पत्नी होने का दावा करने वाली महिला ने आरोप लगाया था। जिस क्लिप के आधार पर यह दावा किया गया, भाजपा नेता ने उसे
#AI से बना बताया
४- दुष्यंत गौतम ने मानहानि का दावा दायर कर दिया है
५- दुष्यंत गौतम का दावा है कि, अंकिता भंडारी का दिल दहलाने वाला घटनाक्रम जब हुआ, उस दौरान वो उत्तराखंड में नहीं थे, उत्तराखंड पुलिस ने भी इसकी पुष्टि की
६- नैनीताल उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड की धामी सरकार की जांच पर किसी भी तरह के पक्षपात के आरोप को खारिज किया
७- अंकिता भंडारी के गांव जाकर धामी ने आर्थिक सहायता का चेक दिया
८- अंकिता के परिवार की मांग पर तीन बार सरकारी वकील बदला गया
९- अंकिता के पिता और भाई को उत्तराखंड सरकार ने नौकरी दी
१०- अंकिता के परिवार की मांग पर धामी सरकार ने
#CBI जांच की संस्तुति की
अब
#तथ्य से परे राजनीतिक नैतिकता की बात
दुष्यंत गौतम को सीबीआई जांच पूरी होने तक राज्यपाल नहीं बनाना था और अभी भी दुष्यंत गौतम जांच पूरी होने तक राज्यपाल का पद ग्रहण करने से मना करने का नैतिक साहस दिखा सकते हैं, लेकिन आज के समय में नैतिक साहस न्यूनतम रह गया है।
अब बात काँग्रेस की। कांग्रेस के सांसद और जेएनयू प्रोफेसर के ऊपर ११ छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
#JNU की आंतरिक समिति ने कांग्रेसी सांसद को दोषी पाया है, लेकिन राहुल गांधी उसे बचाने में लगे हैं।