Tumhra dukh jayan hai
@ajeetbharti agar ye sab mange man li gai to tum sochoge ki mai khamakha itna bola itna kiya lekin mera naam kahi nahi hoga
अब मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि सरकार ने UGC पर इंगेज नहीं किया, CBSE/NEET पर जब बोलना था, तब एक शब्द नहीं बोला, आज कैसे थूक चाटने लगे?
यही बात तो पार्टी के समर्थक सात महीने से बोल रहे थे। पूरा कम्यूनिकेशन ब्लैकआउट किया, मीडिया में अपने प्रवक्ताओं को भेजना बंद किया, हाउस अरेस्ट कराया, सुप्रीम कोर्ट से स्टे के बाद से ऐसे जताया कि उपकार कर दिया हो, आज घुटनों पर आ गए?
यही इस सरकार का पैटर्न बन चुका है। फोड़े को बवासीर बनने देते हैं, फिर जब लगता है कि अब मामला हाथ से निकल गया, तब झुक कर बात मानने को तैयार हो जाते हैं।
सुबह के 11 बजे तक यह आंदोलन सरकार के हिसाब से चल रहा था, नियंत्रण में था। अब यह स्पष्ट है कि नड्डा के घर बुलाने और तीन माँगें सुनने के बाद, तिलचट्टों का विश्वास आकाश पर है और वो CAA, किसान आंदोलन की तरह, भारत को नया, फर्जी आंदोलन देने जा रहे हैं।
अब मुझे देखना है कि माँगों पर सरकार करती क्या है! आत्महत्या करने वालों के परिजनों को एक करोड़ की माँग उचित है, क्योंकि अधिकांश पेपर लीक के कारण ही ‘सॉरी’ लिख कर मरे। दो अन्य माँगों में से एक प्रधान के त्यागपत्र की है, जो होना तो जनवरी में ही था, पर ईगो के कारण आज तक खींच लाई सरकार।
प्रधान अब इनके गले की फाँस बन चुका है।ये हर वो चीज करते हैं, जिसका इन्होंने पहले विरोध किया पर वामपंथी इनसे करवाते हैं। ‘कास्ट सेंसस’ ये राहुल के कहने पर करा रहे हैं, और प्रधान अब तिलचट्टों के कहने से जाएगा।
इनकी पुलिस आज फिर पिटी है, जैसे लाल किला वाले आंदोलन में पिटी थी। आईटीसेलिए फिर से विक्टिम बने घूम रहे हैं और यह पूछ रहे हैं कि ‘क्या ऐसे लोग विद्यार्थी हैं’? फिर अपने मालिक से पूछो न कि क्यों नड्डा से मीटिंग को तैयार हो गए?
जब सरकार अपने समर्थकों पर थूकती है तब उन्हें दूसरों का थूका चाटना ही पड़ता है।