The ideology of the Bahujan Samaj Party (BSP) is Social Transformation & Economic Emancipation of the Sarv Samaj #bspindia @mayawati

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1. जैसाकि यह विदित है कि श्री आकाश आनन्द को कल बी.एस.पी. में वापिस लेकर व पार्टी का पुनः राष्ट्रीय संयोजक बनाकर इनको पार्टी के कार्यो में लगा दिया है। 2. लेकिन आज अधिकांशः मीडिया में इस बात को काफी बढ़ा-चढ़ाकर लिखा है कि श्री आकाश आनन्द को चार बार पार्टी से निकालकर अब पुनः पार्टी में वापिस ले लिया है और इनको फिर से पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बना दिया है। 3. जबकि इस सम्बन्ध में इनको मैं यह भी अवगत कराना चाहती हूँ कि श्री आकाश आनन्द की शादी होने से पहले ही वे पार्टी में काफी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, जिसकी वजह से इनको पार्टी से कभी भी नहीं निकाला गया है। 4. लेकिन इनका रिश्ता श्री अशोक सिद्धार्थ के साथ होने के बाद से फिर इन्होंने अपने ख़ुद के स्वार्थ मे श्री आकाश आनन्द की इमेज को काफी कुछ ख़राब करने का प्रयास किया है। * जिसके कारण फिर श्री आकाश आनन्द में सुधार लाने के ख़ास उद्देश्य से इनको पार्टी से कई बार निकालना भी पड़ा है और ग़लती का एहसास होने के बाद फिर इनको वापिस भी लेना पड़ा है। 5. लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि श्री अशोक सिद्धार्थ के संन्यास लेने के बाद से अब ऐसी कोई भी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिये कि पार्टी को फिर से इनको अलग करना पडे़। 6. अर्थात् जिस प्रकार से इन्होंने शादी से पहले पार्टी को कभी भी कोई शिकायत का मौक़ा नहीं दिया है, जिसके कारण इनको कभी भी पार्टी से निकालना नहीं पड़ा है और अब श्री अशोक सिद्धार्थ के संन्यास लेने के बाद तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है कि इनको अब आगे कभी भी पार्टी से निकालने की ज़रूरत पडे़गी और अब वे राजनीति में आगे ही बढ़ेंगे, ऐसी सभी को पूरी-पूरी उम्मीद भी है। 7. इसलिए मीडिया को यह सब सच्चाई को उजागर करते हुये तब इनके बारे में पार्टी से कई बार निकालने का उल्लेख करना चाहिये तो यह बेहतर होगा।
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1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमूपज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनके परम अनुयायी मान्यवर श्री कांशीराम जी की देश भर में बहुजन-हित हेतु ज़बरदस्त त्याग-तपस्या, आजीवन कड़ा संघर्ष व उनके उच्च आदर्श हमेशा ही प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं, जिस पर चलकर ही बी.एस.पी. ने देश की राजनीति में अभूतपूर्व सफलतायें अर्जित की हैं और अब ख़ासकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव को लेकर सर्वसमाज के साथ उत्साहपूर्ण ज़बरदस्त तैयारी भी की जा रही है। 2. यहाँ यह भी कहना हैं कि मेरा निजी नहीं बल्कि पूरा ’बहुजन समाज’ ही मेरा विराट परिवार है और उनका हित व कल्याण मेरे लिये सर्वोपरि है और हमेशा ही रहेगा। इसी को मद्देनज़र रखते हुये व ख़ासकर पार्टी में अनुशासन बनाये रखने के लिये ही मेरे द्वारा पिछले कुछ दिनों में, अनेकों सख़्त फैसले भी लिये गये हैं और इसको लेकर मेरे अपने भाई-बहन व उनके परिवार के लोग कभी भी अपवाद नहीं रहे हैं, जो कि जग-ज़ाहिर है। 3. वैसे तो श्री आकाश आनन्द का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहें हैं जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ ज़रूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अन्ततः श्री आकाश आनन्द के ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर भी होना पड़ा है। * जिसके बाद से श्री आकाश आनन्द के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका ख़ास प्रमाण पार्टी में वापिसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया ’एक्स’ पर किया गया उनका एक पोस्ट भी है, जिसकी काफी चर्चा भी है। 4. इसको लेकर पार्टी के अधिकांशः लोगों का यही कहना है कि श्री आकाश आनन्द के अनुरोध को स्वीकार करते हुये उनकी पूर्व की दी गई ज़िम्मेवारियों के साथ इनको पार्टी में पुनः कार्य करने का मौक़ा दिया जाये, जिसके लिए इनके पिता के साथ-साथ इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द ने भी अपनी सहमति जताई है। वास्तव में श्री ईशान आनन्द ने तो अपनी मिशनरी भावना प्रदर्शित करते हुये यह भी कहा है कि वे बिना किसी पद के ही पार्टी में मा. बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी उनको कार्य सौंपे जायेंगे तो उसे वे अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से ज़रूर निभायेंगे। 5. ऐसे में अब पार्टी काफी सोच-विचार करने के बाद पार्टी व मूवमेन्ट के हित में श्री आकाश आनन्द को पुनः बी.एस.पी. का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वेनर) बनाकर इनको फिर से पार्टी में कार्य करने का मौक़ा दे रही है। उम्मीद है कि श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति सेे संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा, हालाँकि यह काफी कुछ श्री आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा। 6. इन्ही कुछ ज़रूरी बातों के साथ ही अब मैं पार्टी व मूवमेन्ट के हित में आज लिये गये इस फैसले के साथ ही श्री आकाश आनन्द के राजनैतिक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ही इनको (श्री आकाश आनन्द) व इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द को तथा इनके पिता श्री आनन्द कुमार को भी अपना बहुत-बहुत प्यार व आशीर्वाद देती हूँ। इतना ही नहीं बल्कि पिछले दिनों हर परिस्थिति में मेरा साथ निभाने के लिए ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों का व अपने सभी शुभचिन्तकों आदि का भी मैं पूरे तहेदिल से व सम्मान के साथ उनका आभार भी प्रकट करती हूँ।
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बी.एस.पी. द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति-दिनांक 04.10.2026 (1) बी.एस.पी. प्रमुख बहन कु. मायावती जी द्वारा उत्तराखण्ड स्टेट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक में ख़ासकर चुनाव आयोग के एसआईआर पुनरीक्षण के बाद वोटर लिस्ट की ताज़ा स्थिति तथा यूपी व पंजाब के साथ वहाँ होने वाले आगामी विधानसभा आमचुनाव हेतु अच्छे व दमदार उम्मीदवारों के चयन की प्रगति समेत अन्य चुनावी तैयारियों की भी गहन समीक्षा की गयी। (2) विशेषकर ग़रीबों, युवाओं, महिलाओं व कमज़ोर तबकों के लोग वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित ना रह जायें, इसके लिये उनके नाम वोटरलिस्ट में शामिल करने का प्रयास पार्टी स्तर पर लगातार जारी रखने का निर्देश। (3)उत्तराखण्ड सरकार की विभिन्न ग़रीब व जनविरोधी कार्यशैली की तीव्र निन्दा। राज्य सरकार जनहित व जनकल्याण पर कम ध्यान देकर बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के हित के प्रति ज़्यादा समर्पित लगती है, जो अहम चुनावी मुद्दा। लखनऊ, 4 अक्तूबर 2026, रविवार: बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद बहन कु. मायावती जी ने बी.एस.पी. उत्तराखण्ड स्टेट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ आज यहाँ अहम बैठक में ख़ासकर चुनाव आयोग के एसआईआर पुनरीक्षण के बाद वोटर लिस्ट की ताज़ा स्थिति तथा यूपी व पंजाब के साथ वहाँ होने वाले आगामी विधानसभा आमचुनाव हेतु अच्छे एवं दमदार पार्टी उम्मीदवारों के चयन की प्रगति समेत अन्य और भी चुनावी तैयारियों की गहन समीक्षा की गयी। बी.एस.पी. सेन्ट्रल कैम्प कार्यालय, माल एवेन्यू में आयोजित इस बैठक में वोटरलिस्ट की एसआईआर उपरान्त पोलिंग बूथ स्तर तक की कमेटियों के पुनर्गठन को युद्ध स्तर पर पूरा किये जाने की स्थिति की समीक्षा की गयी तथा कमियों को समयबद्ध तरीक़े से पूरा करने के निर्देश दिये गये। उल्लेखनीय है कि एसआईआर उपरान्त लगभग 9 लाख वोटरों के नाम वोटरलिस्ट से हटा दिये गये हैं, किन्तु विशेषकर ग़रीब, युवा, महिलायें व कमज़ोर तबकों के लोग वोट देने के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित ना रह जायें इसके लिये उनके नाम वोटरलिस्ट में शामिल करने का प्रयास पार्टी स्तर पर ज़रूर जारी रहना चाहिये। बैठक में उत्तराखण्ड सरकार की ख़ासकर ग़रीब व जनविरोधी कार्यशैली की तीव्र निन्दा करते हुये कहा गया कि भाजपा सरकार जनहित व जनकल्याण पर कम ध्यान देकर बड़े- बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के हित के प्रति ज़्यादा समर्पित लगती है, जिनके धनबल पर भी वे लोग चुनाव को अपने पक्ष में प्रभावित करते रहते है, जो अहम चुनावी मुद्दा भी है। यूपी की तरह ही सघन चुनावी तैयारियों के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की आगामी 9 अक्टूबर को पुण्यतिथि को, पूर्व के निर्देशानुसार, पूरी मिशनरी भावना से आयोजित करने पर बल देते हुये मा. बहनजी ने कहा कि यूपी-दिल्ली सीमा पर बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित भव्य ’बहुजन प्रेरणा केन्द्र’ में रख-रखाव का सरकारी कार्य जारी रहने के दौरान लोगों की भीड़ एकत्र होने पर किसी दुर्घटना आदि की संभावना से बचने के लिये इस वर्ष वहाँ कार्यक्रम आयोजित नहीं किये जा रहे हैं। इसीलिये पूरे यूपी के सभी मण्डलों के लोग राजधानी लखनऊ आकर यहाँ विशाल गुम्बद आकार के भव्य ’मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ पर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे, जबकि अन्य राज्यों के लोग ज़ोन-स्तर पर खुली संगोष्ठी आयोजित कर मान्यवर श्री कांशीराम जी, को अपने श्रद्धा-सुमन व भावभाीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। जारीकर्ता: बी.एस.पी. यूपी स्टेट कार्यालय 12 माल एवेन्यू, लखनऊ
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28-09-2026 - PRESS NOTE EVM-SIR
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1. यूपी के आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारी हेतु समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख का प्रचारित ’पीडीए रथ’ सपा के अपने लाल रंग का कम तथा आरएसएस/भाजपा के ’भगवा’ रंग का (भगवाकरण) ज़्यादा है, तो ऐसे में लोगों में चर्चा यही है कि यह सब उनका वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर गिरगिट की तरह लगातार रंग बदलना है या फिर मुसलमानों पर से सपा प्रमुख का वोट पाने का भरोसा उठ जाना है? 2. वैसे भी यूपी के ख़ासकर मुस्लिम समाज को इस कड़वी हकीकत का पूरी तरह से अहसास है कि पिछले चुनावों में सपा को उनके द्वारा अधिकांश एकतरफा वोट देने के बावजूद भी यह पार्टी (सपा) यूपी व केन्द्र की सत्ता में भाजपा को सरकार बनाने से नहीं रोक पाती है तो इस पार्टी को बार-बार वोट देकर अपना वोट ख़राब क्यों किया जाये और इस मामले में अब वे अपरकास्ट में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज की तरह ही अपना रवैया काफी तेज़ी से बी.एस.पी. के पक्ष में बदल रहे हैं। 3. क्योंकि बी.एस.पी. यूपी में खासकर अपराध नियंत्रण व शान्ति-व्यवस्था के मामलों में क़ानून द्वारा क़ानून के राज के साथ ही व्यापक जनहित, जनकल्याण एवं विकास के मामलों में भी बेहतरीन आयरनलेडी राज यहाँ कई बार स्थापित करके दिखा चुकी है और जिसकी सर्वसमाज के हित व कल्याण में प्रदेश को सख़्त ज़रूरत भी है। 4. इसके साथ ही, सपा को यह भी जनता को ज़रूर बता देना चाहिये कि अब इनके ’पीडीए’ की असली वास्तविकता क्या है? क्योंकि चुनावी स्वार्थ में अब तक इन्होंने कभी ’पीडी’ को ’पिछड़ा, दलित’ बताया तो कभी ’पीडी’ को ’पण्डित’ बताया है और कभी अपने आपको ’अम्बेडकरवादी’ दर्शाने के चक्कर में बी.एस.पी. का ’नीला’ रंग वाला वस्त्र धारण कर तस्वीरें खिंचवाई है, किन्तु इसको लोगोें ने फौरन ही फेक अम्बेडकरवादी कहकर रिजेक्ट भी कर दिया। 5. जबकि इसके विपरीत, बी.एस.पी. सर्वसमाज हेतु ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त वाली अम्बेडकरवादी पार्टी है तथा सभी को रोटी-रोज़गार-युक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आदि का जीवन जीने की पक्षधर है। इसीलिये सर्वसमाज में बी.एस.पी. का अपना सम्मान है।
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1. बहुचर्चित सामाजिक न्याय की ज़रूरत व माँग भी यही है कि यूपी सरकार माननीय न्यायालय में यदि इस बात की पुरज़ोर पैरवी करती कि एससी समाज के हित व कल्याण हेतु ’स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान’ के धन से ज़िला सहारनपुर, अम्बेडकरनगर, क़न्नौज व जालौन में बनाये गये मेडिकल कालेजों में एससी वर्ग हेतु अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था 50 प्रतिशत के सामान्य आरक्षण से अलग है और इस व्यवस्था से स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान की भरपूर उपयोगिता साबित होती है, तो शायद माननीय कोर्ट इस पर ज़रूर सकारात्मक विचार करता और इस पर रोक नहीं लगाता। 2. किन्तु अब जबकि मा. हाईकोर्ट ने इस पर पाबन्दी लगा दी है और मेडिकल दाख़िला भी अब यहाँ इससे प्रभावित है, तो ऐसे में यूपी सरकार तुरन्त मा. सुप्रीम कोर्ट में आपेक्षित राहत के लिये अपील करे तो यह उचित होगा।
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1. यूपीआई डिजिटल लेनदेन को पहले ख़ूब बढ़ावा देने के बाद अब सरकार द्वारा उस लेनदेन पर शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था लोगों की नज़र में प्रथमदृष्टया मुनाफाख़ोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत जनता से दोनों हाथों से टैक्स वसूली है, जिससे जनता में बेचैनी व आक्रोश स्वाभाविक है। 2. वैसे तो जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की इस व्यवस्था को ’कर’ मानने को तैयार नहीं है, किन्तु दिनांक 15 अक्तूबर से लागू हाने वाली इस व्यवस्था को चाहे जो भी नाम दिया जाये जेब तो अन्ततः आमजनता की ही कटेगी, उसका ही ख़र्च बढ़ेगा। 3. साथ ही, यह भी सर्वविदित है कि देश की बहुसंख्यक जनता अपार ग़रीबी व ज़बरदस्त महंगाई आदि की मार से त्रस्त है व उनके बच्चे अशिक्षा, बेरोज़गारी व अव्यवस्था आदि से पीड़ित हैं, ऐसे में सरकार की नीति व कार्ययोजना लाभ कमाने वाली व्यावसायिक कम व कल्याणकारी ज़्यादा हो तो यह उचित होगा। जनता की तंगी, दुख-तकलीफ की अगर सरकार चिन्ता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा? 4. इसके साथ ही, यूपी सरकार द्वारा करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के कीरब 14,500 स्कूलों को ’स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा अच्छी बात है, लेकिन बच्चों को कथित ’स्मार्ट पढ़ाई’ से पहले उन्हें बुनियादी शिक्षा आदि की ज़रूरतें अर्थात स्कूली बच्चों के सर पर छत, उनके लिये बेंच, कुर्सी, किताब, शौचालय, मैदान, साफ-सफाई आदि की सही व्यवस्था पूरी की जायें और यह सब प्रति स्कूल क़रीब दो लाख रुपये में क्या संभव हो पायेगा, इस पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर विचार करे।
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ओड़िशा प्रदेश का ख़ासकर पश्चिम और दक्षिण ओड़िशा क्षेत्र के गणपर्व ‘‘नूआ खाइ तिहार‘‘ के अवसर पर मैं सभी जनसाधारण का प्रकृति से सुख, समृद्धि कामना करने के साथ-साथ सभी को नूआ जुहार करती हूँ।
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1. राजस्थान में हुये निकाय चुनाव में बी.एस.पी. ने भी इस बार 19 सीटों पर अपने पार्षद जिताकर भेजे हैं और काफी उम्मीदवार सरकारी मशीनरी की गड़बड़ी की वजह से दोबारा गिनती में ज़बरदस्ती थोड़े-थोड़े वोटों के अन्तर से हरा दिये गये हैं, वरना पार्टी का यहाँ और भी अच्छा रिज़ल्ट आ सकता था। इसके लिए पार्टी ने बी.एस.पी. के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें दी हैं। 2. हालाँकि इससे पहले पंजाब सहित देश के कुछ और राज्यों में भी जो स्थानीय निकाय के चुनाव हुये हैं, तो वहाँ भी पार्टी का पहले से अच्छा नतीजा आया है और वे भी बधाई के पात्र हैं। 3. उम्मीद है कि अब वहाँ आगे होने वाले विधानसभा आमचनाव में व देश में लोकसभा आमचुनाव में भी वे सभी लोग अपनी पार्टी का बेहतर रिज़ल्ट ज़रूर लायेंगे।
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1. सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बी.एस.पी. का शुरु से ही चला आ रहा नीला रंग अब यह इनके गले का गमछा व कपड़े पहनने से तथा स्टेज आदि में भी नीला कपड़ा इस्तेमाल करने से इनकी सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े व अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति वर्षों से चली आ रही इनकी जातिवादी, संकीर्ण, सामन्तवादी एवं पूँजीवादी सोच नहीं बदल सकती है तथा ना ही ये लोग दिल से अम्बेडकरवादी होने एवं कहलाने वाले हैं। इसीलिये ’बहुजन समाज’ के वास्तविक हित व कल्याण के प्रति पहले वे अपना दिल व दिमाग़ तो पाक-साफ करें। 2. वैसे भी ये लोग इन वर्गों के मामले में आए दिन गिरगिट की तरह ही रंग बदलते रहते हैं अर्थात् ये कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं। ख़ासकर इनके सपा के PDA के मामले में तो इनकी सोच, चाल, चरित्र व चेहरा आदि हमेशा दोग़ला व बईमान ही रहा है, जिसके अनेकों उदाहरण हैं, ये सभी जानते हैं। इसलिए इन वर्गों की एकमात्र हितैषी व अम्बेडकरवादी पार्टी केवल बी.एस.पी. ही है, जो सर्वविदित है। 3. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि अन्य पार्टियों की तरह बी.एस.पी. के जो भी लोग पार्टी में अनुशासनहीनता आदि के कारण समय-समय पर निष्कासित कर दिये जाते हैं तो वे अधिकतर इन्हीं सब कारणों से अब तक कई पार्टी बदल चुके हैं, जो किसी से छिपा नहीं है। इसी से ही अन्दाज़ा लगा लेना चाहिये कि ये लोग पूरे स्वार्थी व अवसरवादी हैं और वे किसी भी पार्टी के हित में नहीं हो सकते हैं। 4. इतना ही नहीं बल्कि जिनको पार्टी से निकाल दिया जाता है तो उनमें से कुछ लोग दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलकर छोटी-छोटी पार्टियाँ व संगठन आदि भी बना लेते हैं, जिनसे ’बहुजन समाज’ का सामूहिक हित नहीं हो सकता है, 5. हालांकि ऐसी पार्टियाँ बिना किसी गठबन्धन के भी चुनाव नहीं लड़ सकती हैं तथा किसी भी पार्टी की सरकार बनने पर सरकार में शामिल हुये बिना भी नहीं रह सकती हैं, जो पार्टी से निकाले हुये लोगों को अक्सर अपनी पार्टी में लेने की बात करते हैं या उन्हें पार्टी बनाने की भी सलाह देते हैं, तो वे पहले अपने गिरेबान में भी झाँककर ज़रूर देख लें। 6. ख़ासकर कांग्रेस पार्टी, जिन निकाले हुये लोगों को अपनी पार्टी में लेने की बात कर रही है, तो ऐसी पार्टी में जो डूबते जहाज़ की तरह है, उसमें भला कौन शामिल होकर अपने भविष्य को अन्धकार में डालेगा, जबकि ख़ासकर इस पार्टी से दूरी बनाने के लिये बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर जी ने अपने जीते-जी बहुजन समाज के लोगों को अगाह (चेताया) भी किया था। इसलिये यह सब वर्तमान हालात में, पार्टी व मूवमेन्ट के हित में बी.एस.पी. के लोगों को जानना व समझना भी बहुत ज़रूरी है तो यह उचित होगा। 7. यहां यह भी बताना बहुत जरूरी है कि जिस दिन बी.एस.पी. ने श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी तो उस दिन इन्होंने इनके उपर काफी दबाव पड़ने के बावजूद भी अपने संन्यास लेने की घोषणा तब तत्काल नहीं की थी। 8. क्योंकि उस दिन यह पूरी रातभर इसे रुकवाने के लिए क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करते रहे जिसमें कामयाबी नहीं मिलने पर, फिर मजबूरी में, अगले दिन यह सोच कर इनको लगभग प्रातः 6ः30 बजे अपने संन्यास की काफी किन्तु-परन्तु वाली घोषणा करनी पड़ी है, कि कहीं ज्यादा देरी होने पर और भी बड़ा नुकसान ना हो जाये, जिसके बारे में सही समय आने पर पार्टी के लोगों को और भी बहुत कुछ ज़रूर बताया जायेगा।
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1. आज श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही क़दम है। 2. वैसे लोगों का यही कहना है कि अगर यह फैसला वे काफी पहले ही ले लेते तो बी.एस.पी., बहुजन समाज व बहुजन मूवमेन्ट तथा उनके दामाद श्री आकाश आनन्द को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता और ना ही मुझे विधानसभा आमचुनाव एवं ख़ासकर यूपी में पाँचवीं बार सरकार बनाने की ज़बरदस्त तैयारियों के बीच, पार्टी व मूवमेन्ट के व्यापक हित के मद्देनज़र इनके बारे में कई बार कड़े फैसले लेने आदि की ज़रूरत पड़ती। 3. वैसे यह भी सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी की अम्बेडकरवादी राजनीति की परम्परा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पदचिन्हों पर चलने वाली ज़बरदस्त त्याग, तपस्या, संघर्ष व कुर्बानी आदि के साथ-साथ सबसे बढ़कर निजी व पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की विशिष्ठ पहचान की है, जिसे मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह ही मैं भी समर्पित हूँ और जिससे पार्टी के सभी लोगों को ज़रूर सबक़ सीखकर बी.एस.पी. में आगे बढ़ाने के लिये निजी व पारिवारिक स्वार्थ एवं पद आदि की लालसा से ऊपर उठना चाहिये तभी फिर यहाँ सदियों से शोषित, पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत ’बहुजन समाज’ ’शासक वर्ग’ बन पायेगा और इस क्रम में हमेशा याद रहे कि जितना महान लक्ष्य, उतनी ही बड़ी कुर्बानी की भी ज़रूरत होती है। 4. कुल मिलाकर, श्री अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेने का फैसला ’देर आये दुरुस्त आये’ की कहावत की तरह ही यह अच्छी बात है। 5. किन्तु श्री अशोक सिद्धार्थ को, अपने दामाद श्री आकाश आनन्द के उज्जवल भविष्य के साथ ही बी.एस.पी. पार्टी व इसके अम्बेडकरवादी बहुजन मूवमेन्ट के व्यापक हित के प्रति थोड़ी भी सही चिन्ता होती, (जो कि उनमें स्वाभाविक तौर पर होनी ही चाहिये), तो वे बिना देरी किये कल फ़ौरन ही राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर देते और जिससे श्री आकाश आनन्द की पार्टी व मूवमेन्ट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी, किन्तु ऐसा कुछ नहीं होना यह साबित करता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट व अभिलाषा कम नहीं हुई है बल्कि अभी तक भी पूरी तरह से बरक़रार है। 6. इतना ही नहीं बल्कि श्री आकाश आनन्द द्वारा भी अपने कैरियर से अधिक अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव क़ायम है कि उन्होंने बी.एस.पी प्रमुख के सोशल मीडिया एकाउण्ट ’एक्स’ पर तत्सम्बंधी पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा, हालाँकि यह पोस्ट उनके ही सकारातमक व भलाई के लिये था। 7. जबकि इससे पहले वे बी.एस.पी. प्रमुख के ’एक्स’ पर पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं। इससे भी यही लगता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ व श्री आकाश आनन्द दोनों को पार्टी व मूवमेन्ट की सफलता में कम व अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ का ज़्यादा मोह है, जबकि बी.एस.पी. ने ही इन दोनों को व अन्य अनेकों लोगों को भी फर्श (ज़मीन) से अर्श (आसमान) की बुलन्दी पर पहुँचाया है और जिसके लिये उन सभी लोगों द्वारा बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व का जितना भी वे लोग अहसान मानें व शुक्रगुज़ार हों, वह कम ही होगा, ऐसा सभी लोगों का मानना है। 8. ऐसे हालात में श्री आकाश आनन्द को पार्टी व मूवमेन्ट के वास्तविक हित तथा इससे जुड़े अपने कैरियर की भी परवाह कम तथा रिश्ते-नातों आदि का मोह ज़्यादा है तो ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि श्री आकाश आनन्द डबल माइण्ड होकर फिर बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट का भला कैसे कर सकते हैं? 9. इसीलिये पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें पहले दिनांक 3 सितम्बर 2026 को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से फ्री (आज़ाद) कर दिया जाये। अतः श्री आकाश आनन्द पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं अर्थात ऐेस में अब इनको पार्टी से पूरेतौर से मुक्त कर दिया गया है। 10. अन्त में यही कहना है कि बी.एस.पी के सभी लोगों को, विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के हथकण्डों का डट कर सामना करते हुये ख़ासकर यूपी में फिर से पूर्ण बहमत की अपनी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की ज़बरदस्त क़ानून-व्यवस्था व बेहतरीन विकास वाली आयरन हुकूमत बनाने के संघर्ष में, पूरे जी-जान से अर्थात पूरे तन, मन, धन की लगन से लगे रहें, बस यही लक्ष्य सर्वोपरि है।
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1. दक्षिण दिल्ली के पाँच मंज़िला पीजी हास्टल के ढहने से 5 लोगों की हुई मौत तथा मध्य प्रदेश के सागर ज़िला में भी ज़हरीली शराब पीने से 18 लोगों की कल हुई मौत व लगभग 190 बीमार लोगों के अस्पताल में इलाज के लिये दाख़िल होने की घटना एवं यूपी व बिहार आदि राज्यों में बाढ़ के कारण जान-माल की तबाही की ख़बरें अति-दुखद व चिन्तनीय। 2. इन घटनाओं से यह साबित होता है कि शासन-प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारियों को सही से नहीं निभा रहा है, जिस कारण जनहित व जनकल्याण के सम्बंध में सरकारों को चुस्त-दुरुस्त होने की सख़्त ज़रूरत है। इस प्रकार से अधिकारियों की घातक होती जा रही लापरवाही, उदासीनता व भ्रष्टाचार आदि पर भी सरकारों को सख़्ती से लगाम लगाने की ज़रूरत।
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1. देश में एक नहीं बल्कि अनेकों ऐसे उदाहरण हैं जिससे लोगों को यह लग रहा है कि सीजेपी का जेन-जी (Gen-Z) अर्थात देश के युवाओं और बेरोज़गारों आदि की ज्वलन्त समस्याओं को लेकर इनका यह आन्दोलन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा हाईजैक कर लेने से युवाओं व छात्रों आदि को जंतर मंतर आन्दोलन के दौरान जो इनको बड़े-बड़े सपने दिखाये गये थे, वे अब स्वतंत्र कम व राजनीतिक ज़्यादा होकर गंभीर शंकाओं में घिर गये हैं। 2. किन्तु ख़ासकर जेन-जी (Gen-Z) व जेन-अल्फा (Gen-Alpha) की ज़रूरी माँगों को लेकर बी.एस.पी. को पूरी सहानुभूति व इसके प्रति चिन्ता भी हमेशा रही है और आगे उनके सहयोग के लिये बी.एस.पी. के सभी स्टेट यूनिटों को निर्देशित किया जाता है कि वे अपने-अपने राज्य व क्षेत्र में सम्बंधित अधिकारियों से मिलकर उनकी समस्याओं के शान्तिपूर्ण तरीक़े से समाधान के लिये ज़रूर तत्पर रहें। 3. लेकिन बी.एस.पी. के अनुशासन के अनुसार पार्टी के लोग धरना, प्रदर्शन व आन्दोलन आदि नहीं करें और अपनी तन, मन, धन की शक्ति एवं ऊर्जा को चुनाव के लिये सुरक्षित रखें, ताकि करोड़ों दलितों व अन्य उपेक्षितों के सच्चे मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सपनों को साकार करने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की अपनी सरकार बनाकर जेन-जी (Gen-Z) और जेन-अल्फा (Gen-Alpha) सहित सर्वसमाज की सभी दुख-तकलीफों आदि का स्थायी समाधान निकल सके, जैसाकि बी.एस.पी. की यूपी में चार बार रही सरकारों में करके भी दिखाया गया है। 4. इसके साथ ही, जेन-जी (Gen-Z) के जंतर मंतर आन्दोलन के दौरान पुलिस अगर समय से उचित कार्रवाई करती तो श्री संजय आज़ाद जैसी गंभीर घटना नहीं होती, किन्तु अब इस प्रकरण के अभियुक्तों के खिलाफ सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई ज़रूर होनी चाहिये वरना फिर बी.एस.पी भी ऐसे मामलों में कोई पीछे नहीं रहेगी।
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1. ज़िला सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आएदिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर उनको ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है वह ठीक नहीं है तथा सरकार को ऐसे निगेटिव हालात से बचने के लिये इस पर तुरन्त रोक लगाकर इसके समाधान के अन्य उपाय ज़रूर करने चाहिये। 2. वैसे भी एक संवैधानिक सेक्युलर सरकार द्वारा सभी धर्मों के मानने वालों एवं उनके धार्मिक स्थलों आदि का एक समान आदर-सम्मान व उनकी सुरक्षा करने का उत्तरदायित्व बनता है। इस्लाम मज़हब में मस्जिदें हर दिन इबादत बल्कि दिन में कई बार जमात के साथ नमाज़ पढ़ने का मुख्य व अभिन्न अंग हैं, जिसको ध्यान में रखकर व भारतीय परम्परा के अनुसार सम्मान देना देश व व्यापक जनहित में ज़रूरी है। 3. इसके साथ ही, बिना नियम-क़ानून का समुचित अनुपालन किये हुये किसी भी अभियुक्त का मकान ध्वस्त करके उसके पूरे परिवार को सामूहिक तौर पर सज़ा देकर बेघर बार कर देने की कार्रवाईयों से भी लोग काफी विचलित हैं। ऐसे में बी.एस.पी सरकार की तरह का ’क़ानून द्वारा क़ानून का राज’ का व्यवहार ज़रूरी है। 4. अतः केवल सरकार ही नहीं बल्कि माननीय न्यायालय भी इस ओर समुचित ध्यान दें तो यह उचित होगा। लेकिन ऐसे हालात में सभी लोग सौहार्दपूर्ण वातावरण भी ज़रूर बना कर रखें, पार्टी की यह भी अपील है।
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1. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर अर्थात जीडीपी ग्रोथ के सरकारी दावे को लेकर ज़बरदस्त बहस छिड़ी हुई है, और देश में ख़ासकर अति-महंगाई, अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी आदि की मार से पीड़ित आमजनता अचंभित भी है कि वह किस पर भरोसा करे और किस पर ना करे। 2. वैसे इसके सम्बंध में सरकार के आसमान छूते दावे को प्रथम दृष्टया मान लिया जाये तो यह अच्छी बात होगी, किन्तु अगर यह जुगाड़ के आँकड़े हैं तो यह चिन्ता की बात ज़रूर है। इसीलिये जनता में उम्मीद जगाने हेतु सरकार को विश्वसनीय ढंग से यह ज़रूर बताना चाहिये कि इस उच्च विकास दर का क्या लाभ देश की करोड़ों ग़रीब मेहनतकश जनता को मिला है और आगे में इसका क्या लाभ होगा। 3. इतना ही नहीं बल्कि यह मुद्दा आमजनहित से जुड़ा होने के कारण विकास के आँकड़े व दावे दोधारी तलवार की तरह हैं। इसीलिये उन्हें ज़मीनी हक़ीक़त से भी ज़्यादातर आँका जाता है अर्थात् विकास वही सही व उपयोगी जो जनता को भाये यानी जनता के जीवन में समतामूलक परिवर्तन लाये और लोग ख़ुश व खुशहाल बनें। 4. अतः जीडीपी ग्रोथ के आँकड़े व दावे आदि अपनी जगह है, लेकिन विकास की असल हक़दार देश की करोड़ों मेहनतकश जनता को भी इसका लाभ मिलना और उसे इसका महसूस होना भी देश व जनहित में ज़रूरी है, वरना यहाँ के लगभग 140 करोड़ लोग ’धनवान सरकार की ग़रीब जनता’ होने का बोझ लगातार ढोती रहेगी। देश का विकास तभी ’अच्छे दिन’ वाला होगा जब यहाँ की करोड़ों बहुजन मेहनतकश जनता ग़रीबी, बेरोज़गारी व भ्रष्टाचार आदि से मुक्त आत्म-सम्मान का थोड़ा सुखी जीवन जीने योग्य बनेगी। 5. इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों का दोगुना तक मानदेय बढ़ाने तथा 20 लाख लागों को सुरक्षा कवर आदि यूपी आउटसोर्स सेवा निगम की स्थापना के माध्यम से देने के फैसले से कहीं बेहतर होता लोगों को सीधे तौर पर सरकारी नौकरी देना, ताकि यह व्यवस्था अफसरशाही की मनमानी, भ्रष्टाचार एवं शोषण आदि की जंजाल से मुक्त हो।
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बी.एस.पी. द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति-दिनांक 03.09.2026 (1) बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कु. मायावती जी द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में पार्टी व मूवमेन्ट से सम्बन्धित पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष सालाना होने वाले कार्यों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रुरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अनुपालन करने की सख़्त हिदयात। (2)वैसे भी पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी के त्याग, तपस्या व समर्पण की तरह ही, मेरे लिये भी ’बहुजन समाज’ का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता अर्थात बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट द्वारा ’शोषित वर्ग को शासक वर्ग’ बनाने का मिशनरी लक्ष्य सर्वोपरि है जिसके लिए सत्ता भी ज़रूरी। (3)इसके अलावा, आर.एस.एस. (RSS) प्रमुख श्री मोहन भागवत के अमेरिका दौरे में कही गयी बातों का भी संज्ञान लेते हुये बहन कु. मायावती जी ने कहा कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने जातिवाद व असमानता आदि के विरुद्ध आजीवन कड़े संघर्षों के बल पर एससी, एसटी व ओबीसी समाज के (4)अर्थात् ’बहुजन समाज’ के करोड़ों लोगों के आत्म-सम्मान तथा उनके वास्तविक हित, कल्याण व उनके लिये आरक्षण के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के जान, माल एवं मज़हब की सुरक्षा तथा महिलाओं आदि के मामलों में भी आरएसएस की कथनी व करनी में ज़मीन-आसमान का भारी अन्तर होने से उनमें विश्वसनीयता का अभाव है। अतः आरएसएस, बाबा साहेब के मानवतावादी व समतामूलक संविधान पर खुद ईमानदारी व निष्ठा से अमल करे और अपने लोगों पर उसपर अमल भी कराये, यही पूरी तरह से देश व जनहित में होगा। (5)साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने देश व दुनिया के ज्वलन्त मुद्दों पर भी पार्टी के लोगों का ध्यान आकृर्षित कराया। लखनऊ, 03 सितम्बर 2026, वृहस्पतिवार: बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की चार बार रहीं मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद तथा ’बहुजन समाज’ के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान की प्रतीक बहन कु. मायावती जी द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व उनकी कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष के सालाना होने वाले कार्यों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रूरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अनुपालन करने की भी सख़्त हिदायत दी गयी। इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि बी.एस.पी., परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के आदर्श सिद्धान्तों व उच्च आदर्शों को लेकर चलने वाली उनके ’आत्म-सम्मान व स्वाभिमान’ के कारवाँ को सत्ता की मंज़िल तक पहुँचाने के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु समर्पित पार्टी एवं मूवमेन्ट है, जिसको लेकर मान्यवर श्री कांशीराम जी ने उच्च वैज्ञानिक पद की अपनी सरकारी नौकरी भी छोड़ दी थी। और फिर अपने माँ-बाप का घर, परिवार, रिश्तों-नातों आदि ये सब कुछ त्यागकर अपना पूरा जीवन कड़ा संघर्ष करते रहे और मुझे भी ख़ासकर शोषितों को जागरुक करने के लिए देश के कोने-कोने में भेजकर इस योग्य बनाया कि मैं, उन्हीं के नक्शेक़दम पर चलते हुये, उनके अधूरे रहे कारवाँ को आगे बढ़ाने की पूरी त्याग व तपस्या में लगी रहूँ और अन्ततः उन्होंने मुझे बी.एस.पी. पार्टी व बहुजन मूवमेन्ट का राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बनाया। और मैंने भी उनके जीते-जी ही काफी हद तक अच्छा रिज़ल्ट लाकर भी दिखाया है और उनके संघर्ष को विनम्र श्रद्धांजलि के रूप में यूपी में पूर्ण बहुमत की बी.एस.पी. सरकार बनाकर बहुजन मूवमेन्ट के मान-सम्मान को ऐतिहासिक व गौरवशाली भी बनाया है, जो सबकी ज़ुबान पर होने के साथ-साथ तथा यहाँ इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में भी दर्ज है। इसके साथ ही, आदरणीया बहन कु. मायावती जी ने यह भी बताया कि बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी के संकल्प व समर्पण की तरह ही, मेरे लिये भी ’बहुजन समाज’ का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता अर्थात् बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट द्वारा ’शोषित वर्ग को शासक वर्ग’ बनाने का मिशनरी लक्ष्य सर्वोपरि है और इस महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिये निजी तौर पर मेरा ना तो कोई अपना है और ना ही पराया। जो भी बी.एस.पी व बहुजनों के हित के काम करेगा उसका स्वागत व आभार भी है। और इसीलिये जिस प्रकार मान्यवर श्री कांशीराम जी ने अपने परिवार के लोगों व अन्य रिश्तों-नातों आदि को पार्टी कार्य में सहयोग करने की छूट तो दे दी थी, किन्तु उन्हंे चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर कोई भी पद आदि देने के वे खिलाफ थे, उसी प्रकार से उस संकल्प पर मैं भी पूरी तरह से क़ायम हूँ। जिस पर अमल करते हुये ही मैंने श्री आकाश आनन्द को पार्टी में कार्य करने की तो इनको इजाज़त दी है, जो हक़ीकत आप सभी लोगों के सामने है, लेकिन इस मामले में श्री आकाश आनन्द को अभी और अधिक परिपक्व/मैच्योर होने की जरुरत है। तब तक इनको पार्टी की अभी बड़ी ज़िम्मेवारी देना उचित नहीं होगा, जो कि विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों को इस्तेमाल करके चुनाव में हानि पहुँचाने से बचने के लिये भी समय की ज़रूरत है। बी.एस.पी. यूपी स्टेट कार्यालय में आयोजित इस आल-इण्डिया की बैठक को सम्बोधित करने से पहले मा. बहनजी ने बी.एस.पी. सेन्ट्रल कैम्प कार्यालय में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों व अन्य ज़िम्मेदार लोगों से राज्यवार समीक्षा बैठक की और उनसे उनके राज्यों में पार्टी संगठन की मज़बूती एवं पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के बारे में पिछली आल-इण्डिया की हुई बैठक में दिये गये दिशा-निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट ली और उल्लेखित कमियों को समयबद्ध तरीके़ से दूर करने की भी हिदयात दी। ख़ासकर यूपी, उत्तराखण्ड व पंजाब में ये कार्य चुनाव की घोषणा से काफी पहले ही पूरा करने के भी जरुरी निर्देश मा. बहनजी ने पार्टी के लोगों को दिये, जिसके लिए उन्होंने 25 अगस्त को पंजाब स्टेट की व 31 अगस्त को उत्तर प्रदेश स्टेट की अलग से पार्टी की बड़ी बैठक भी बुलाई, जिसकी जानकारी मीडिया बन्धुओं को भी है। इसके साथ ही, बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की अगले महीने दिनांक 9 अक्तूबर को पुण्यतिथि के अवसर पर यूपी मंे प्रदेश स्तर पर तथा बाकी राज्यों में ज़ोन-स्तर पर ’खुली संगोष्ठी के कार्यक्रम’ पूरी मिशनरी भावना से आयोजित करने के निर्देश देते हुये कहा कि इन कार्यक्रमों को बी.एस.पी. के प्रदेश व मुख्य ज़ोन प्रभारी आदि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि बी.एस.पी. दिल्ली प्रदेश के सभी लोग नई दिल्ली गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर स्थित ’बहुजन समाज प्रेरणा स्थल’, जहाँ मान्यवर श्री कांशीराम जी की अस्थिकलश प्रतिष्ठापित है, वहाँ पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे। इसके अलावा, यूपी-दिल्ली सीमा पर बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित भव्य ’बहुजन प्रेरणा केन्द्र’ में रख-रखाव का वर्तमान में सरकारी कार्य चलने के कारण इस वर्ष पश्चिमी यूपी के लोग भी, यूपी के बाकी सभी मण्डलांे के लोगों के साथ ही लखनऊ आकर यहाँ वीआईपी रोड पर, वहाँ ’बौद्ध स्मृति उपवन’ के सामने, बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित विशाल गुम्बद आकार के भव्य ’मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ पर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे, जिस कार्यक्रम को पूरी मिशनरी भावना से सफल बनाना है। इसके साथ-साथ हर वर्ष की तरह बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष के जन्मदिन के मौके पर पार्टी को आर्थिक सहयोग देने के लिए भी ज़रूरी दिशा-निर्देश दिये गये, जिस पर पार्टी के लोगों ने अपनी सहमति भी जताई। इसके अलावा, आरएसएस प्रमुख श्री मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान भारत की अनेकता में एकता आदि सम्बंधी कही गयी बातों का संज्ञान लेते हुये बहन कु. मायावती जी ने कहा कि भारत में ख़ासकर जातिवाद व असमानता तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अथक संघर्षों से एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के अर्थात देश में ’बहुजन समाज’ के करोड़ों लोगों के वास्तविक हित, कल्याण और उनके आरक्षण के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ महिलाओं, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के जान, माल व मज़हब की सुरक्षा-सम्मान आदि के मामलों में आरएसएस की कथनी व करनी में ज़मीन-आसमान का भारी अन्तर होने के कारण ही उनमें विश्वसनीयता का अभाव है तथा यह संगठन काफी पुराना होने के बावजूद वह मान्यता/सम्मान अर्जित नहीं कर पाया है जो वे चाहते हैं। इसीलिये आरएसएस के लोग, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी, कल्याणकारी व समतामूलक संविधान में अपनी पूरी आस्था व निष्ठा रखते हुये उस पर खुद ईमानदारी से अमल करें और उसी के हिसाब से अपने लोगों को उस पर अमल करने को बाध्य भी करें तो यह पूरी तरह से देश व जनहित में होगा और देश अवश्य ही अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा को दूर करके विकास की ओर तेज़ी से अग्रसर होगा जो कि संविधान का मुख्य उद्देश्य भी है और जिसके लिये बी.एस.पी. की स्थापना की गयी है और सरकार में रहते हुये व सरकार में नहीं रहने पर भी लगातार संघर्षरत है, और यही देश की जातिवादी व जनविरोधी पार्टियों के खिलाफ बी.एस.पी. की अम्बेडकरवादी पहचान है। जबकि अन्य पार्टियों की तरह कांग्रेस पार्टी तो हर मामले में जबरदस्त दलित व अम्बेडकर विरोधी पार्टी है, जिसका इतिहास किसी से छिपा नहीं है। ऐसी स्थिति में अब पार्टी ने पूरे देश में सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले ही लड़ने का फैसला लिया है। इसके साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस समय दुनिया के कई भागों में जारी जंग तथा उसके फलस्वरूप तेज़ी से बदलते हुये संगीन हालात व सुरक्षा उपायों आदि में भी भारत की अपनी नीति/रणनीति मज़बूत होनी चाहिये। और अब फिर से देश में आएदिन बढ़ रही महंगाई व कुदरती हो रही मार भी काफी चिन्ताजनक है। साथ ही, वर्तमान में जेन-जी (Gen-Z) व जेन-अल्फा (Gen-Alpha) आदि की भी चल रही गम्भीर समस्याओं को दूर करना बहुत ज़रूरी है। राज्यों के साथ-साथ खासकर केन्द्र सरकार भी इन सब मामलों को ज़रूर गम्भीरता सेे ले, तो यह देश व जनहित में उचित होगा। जारीकर्ता: बी.एस.पी. यूपी स्टेट कार्यालय 12 माल एवेन्यू, लखनऊ-226001
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