गुजरात में कड़ी मेहनत करने वाले मनरेगा श्रमिकों के करोड़ों रुपये 20 जून 2026 से नहीं चुकाए गए हैं, जिसके कारण श्रमिकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मनरेगा कानून के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार श्रमिकों द्वारा किए गए काम का भुगतान 15 दिन के भीतर उनके बैंक खाते में जमा हो जाना चाहिए, लेकिन सरकार ने इसकी पूरी तरह अनदेखी की है।
गुजरात में श्रमिकों के 43,44,49,507 (तैंतालीस करोड़ चौंतालीस लाख उचास हज़ार पाँच सौ सात) रूपये नहीं दिए गए है । अकेले भावनगर जिले में मनरेगा श्रमिकों के 2,66,01,850 (दो करोड़ छियासठ लाख एक हजार आठ सौ पचास) रुपये और सुपरवाइजरों (मेट) के 1,00,44,313 (एक करोड़ चवालीस हजार तीन सौ तेरह ) रुपये पिछले कई महीनों से बकाया हैं । भावनगर जिला ग्रामीण विकास एजेंसी के निदेशक ने 17/09/2026 को ग्रामीण विकास कमिश्नर को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि भुगतान न होने के कारण श्रमिक आंदोलन और आत्महत्या की चेतावनी दे रहे हैं। मनरेगा श्रमिकों को उनके हक का पैसा नहीं मिला है, जबकि दूसरी ओर योजना में भाजपा के पूर्व मंत्री और नेताओं के भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी की प्रमुख मांगें:
• पूरे गुजरात में मनरेगा योजना के तहत श्रमिकों के सभी बकाया पैसों का तत्काल भुगतान किया जाए।
• कानूनन १५ दिन में भुगतान होने के नियम के बावजूद ४-४ महीने तक पैसे न मिलने के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करके उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई (क्रिमिनल केस) दर्ज किया जाए।
• भुगतान में देरी होने के कारण श्रमिकों को उनकी बकाया राशि पर ब्याज का भुगतान दिया जाए।
• मनरेगा श्रमिकों को समय पर महेनताना न देने पर सरकार माफी मांगे
• जिन श्रमिकों ने आत्महत्या की चेतावनी दी है, उनसे अनुरोध है कि वे ऐसा कोई भी अंतिम और घातक कदम न उठाएं।