वहां कौन है तेरा.. मुसाफिर...
जाएगा कहां..
दम लेले घड़ी भर..
ये छैया पाएगा कहां..
गाइड एक फ़िल्म नहीं जीवन का दर्शन थी जो सिखाती है कि व्यक्ति जिसके पीछे जीवन भर भागता रहता है, अन्त में उसे अपने ही निकट पाता है, पर तब उसका उसके जीवन में उसका कोई मूल्य नहीं होता है, एक भटके हुए पथप्रदर्शक की कथा जिसका व्यवसाय ही मार्गदर्शन था, एक भटका हुआ राजू हम सबमें है🙄😐😑