2005 से पहले का झूठा रोना अब निकम्मों की सरकार का ढाल नहीं बन सकता ..
20 साल से ज्यादा सत्ता में बैठने के बाद भी अगर अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए 2005 से पहले के बारे में झूठी गढ़ी गयी कहानी का सहारा लेना पड़ रहा है, तो इससे बड़ा नाकारापन और क्या होगा ? आज राज्य में लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, लेकिन सत्तापक्ष के लोग पुरानी, घिसी - पिटी , गढ़ी गयी कव्वाली गा कर ही अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ ले रहे हैं ।
इन लोगों से मेरा साफ़ कहना है कि खुद के निक्कमेपन पर पर्दा डालने के लिए अतीत के उन पन्नों के पीछे छिपना बंद कीजिए, जो पन्ने आप लोगों के ही द्वारा लिखे गए और सरासर झूठे हैं ।
पिछले 20 सालों से बिहार में उन्हीं लोगों की सरकार है , जो अपनी नाकामी छुपाने में उस्ताद हैं , जब भी कानून-व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, ये तमाम लोग २००५ के पहले का झूठा राग अलापने लगते हैं। आज के अपराध, आज की बदहाली और आज के प्रशासनिक तंत्र की नाकामी का हिसाब कौन देगा? निकम्मेपन की भी एक सीमा होती है!"