गुलाम दलितों की हीनभावना! 🤡
दलितों का एक हिस्सा हीनभावना का इस कदर शिकार है कि कोई भी गैर-SC-ST व्यक्ति उन्हें जय भीम का नारा लगाते दिख जाए, तो उसे सिर पर चढ़ाकर ऐसे नाचने लगते हैं, मानो उन्हें मुक्ति ही मिल जाएगी। लक्ष्मण यादव के बाद दलितों ने अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी की लफ्फाजी में रस लेना शुरू कर दिया है।
दलितों ने बाबासाहेब द्वारा बनाए गए रानी झांसी मार्ग स्थित भवन में भारतीय बौद्ध महासभा के माध्यम से एक कार्यक्रम आयोजित किया था। उसमें राजकुमार भाटी को मुख्य अतिथि बनाकर बुलाया गया और लार टपकाते हुए दलितों ने उन्हें पंचशील का पटका पहना दिया। जोश-जोश में राजकुमार भाटी ने बाबासाहेब की 22 प्रतिज्ञाएँ भी पढ़ लीं। इसे देखकर कल से ही कई दलित सोशल मीडिया पर पूंछ उठाकर नाच रहे हैं।
अब दूसरे ही दिन उनके अंदर का हिंदू जाग गया और उन्हें समझ में आने लगा कि अरे, उन्होंने तो घोर अनर्थ कर दिया है! ऐसे में राजकुमार भाटी ने वीडियो बनाकर सारा दोष दलितों और आयोजकों पर मढ़ दिया और कहा कि न तो उन्हें धर्म परिवर्तन करने की कोई आवश्यकता है और न ही ऐसा उनका कोई इरादा है। अर्थात्, वह भी लक्ष्मण यादव की तरह हिंदू ही बने रहेंगे। वैसे राजकुमार भाटी वैचारिक व्यक्ति हैं लेकिन चूंकि वह समाजवादी पार्टी में हैं। ऐसे में उन्हें इसकी कीमत को चुकानी ही होगी।
सच कहूँ तो मुझे न तो लक्ष्मण यादव गलत लगे थे और न ही राजकुमार भाटी गलत लग रहे हैं। दोनों ही हिंदू धर्म में शूद्र हैं और उन्हें शूद्र होने से कोई तकलीफ नहीं है। उन शूद्रों की सारी लड़ाई व्यवस्था परिवर्तन या धर्म परिवर्तन की नहीं है। वे केवल ब्राह्मण प्रभुत्व को खत्म करके अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहते हैं। उनके ज्यादातर महापुरुष भी तो ऐसे ही रहे हैं। ऊपर से ये सपा से जुड़े हुए हैं। ऐसे में स्वतंत्र वैचारिकी की उम्मीद करना ही बेवकूफी है।
गलती तो उन गुलाम दलितों की है, जो हीनभावना में आकर समाजवादी पार्टी के समर्थकों और पदाधिकारियों को भी आम्बेडकरवादी अथवा बौद्ध घोषित करके बौद्ध कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि, वक्ता आदि बनाकर उनके आगे लार टपकाते रहते हैं। ऐसे में, जब दलित खुद चाहते हैं कि वह भीड़ बने रहें तो भला कोई पीछे क्यों रहेगा? लक्ष्मण यादव के बाद अब राजकुमार भाटी भी दलितों का मस्त काट रहे हैं। उन्हें मंगलकामनाएं। बाकी गुलामों का क्या है, जब तक उनकी हीन भावना खत्म नहीं होगी, तब तक कोई भी उन्हें भेड़ों की भीड़ समझकर हांकता रहेगा।