अंकिता भंडारी के माता-पिता जिस वीआईपी का नाम लेकर अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं, भाजपा सरकार ने उसी व्यक्ति को राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठा दिया।
होना तो यह चाहिए था कि सीबीआई की जाँच तेजी से आगे बढ़ती और नामजद आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती, लेकिन भाजपा सरकार ने तो उन्हें राज्यपाल ही बना दिया।
यह निर्णय पूरे उत्तराखंड की जनता का अपमान है, क्योंकि आज पूरा प्रदेश अपनी बेटी अंकिता को न्याय दिलाने की मांग कर रहा है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में अंकिता के माता-पिता द्वारा स्पष्ट रूप से नाम लिए गए वीआईपी को राज्यपाल बनाया जाना उत्तराखंड के आम जनमानस की भावनाओं को गहरी चोट पहुँचाने के समान है। वहीं, सीबीआई की जाँच एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी है और सीबीआई ने नामजद आरोपी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। ऐसे व्यक्ति को राज्यपाल के पद पर नियुक्त करना घोर आपत्तिजनक है।
अतः मैं कल दोपहर 12 बजे गांधी पार्क, देहरादून स्थित गांधी प्रतिमा के सम्मुख प्रतिकारात्मक विरोध स्वरूप एक घंटे के मौन उपवास पर बैठूँगा।