1. यही कांग्रेस है जो 26/11 के बाद पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी कसाब को बचाने के लिए "हिंदू आतंकवाद" की थ्योरी ले आई थी।
2. यही राहुल गांधी है, जिसने हमारी सेना से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे थे, कहा था - खून के ब्रोकर
3. यही लोग हैं, जिन्होंने वायुसेना से बालाकोट के सबूत मांगे थे।
जब सेना पर भरोसा नहीं, तो पुलिस पर कैसे होगा..??
4.इनके लिए देश की हर वर्दी तब तक ही अच्छी है, जब तक वह इनके टुकड़े-टुकडे़ गैंग के सामने लाठी न चलाएं।
5. अंतिम सवाल - इस सोफे की राजनीति का अंत क्या ..??
सोफे पर आराम से बैठकर, पैर हिलाते हुए, फोन पर किसी ईमानदार सिपाही के खिलाफ FIR का आदेश देना - यह कौन सी मोहब्बत की दुकान है??🤷🏼♂️
इस दुकान में नफरत किसके लिए है? देश की उस बेटी के लिए जो 12 घंटे ड्यूटी करती है..?
एक राष्ट्रवादी के रूप में मेरा सवाल साफ है ..🙋
क्या हम ऐसे नेतृत्व के स्वीकार करेंगे जो अपनी राजनीति चमकाने के लिए अपनी ही पुलिस की बेटियों को बलि का बकरा बना दे..?🤔
कैमरे के सामने शाहद आदेश जारी करने से कानून नहीं बदलता। कानून क़िताब से बदलता है, संविधान से बदलता है। और संविधान में लिखा है - कानून सबके लिए बराबर है, सोफे पर बैठे राजकुमार के लिए भी और सड़क पर खड़ी महिला कांस्टेबल के लिए भी।
आज निशाने पर महिला कांस्टेबल चंचल यादव है, कल कोई और वर्दीधारी होगा। आज राजस्थान और केरलम में जीरो FIR का नाटक है, कल किसी और राज्य में होगा ।
देश देख रहा है...!!☝🏽