असम के सिलचर नगर निगम चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 6 अक्टूबर को घोषित परिणामों में 42 सीटों वाले नगर निगम में भाजपा ने 32, AGP ने 2, निर्दलीय उम्मीदवारों ने 6 और कांग्रेस ने केवल 2 सीटें जीतीं।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह चुनाव EVM से नहीं, बल्कि बैलेट पेपर में हुआ था। यानी इस बार कांग्रेस के पास EVM को लेकर सवाल उठाने का विकल्प भी नहीं है।
42 में से 10 सीटें अल्पसंख्यक बहुल थीं। इन सीटों पर 6 निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत हुई, जबकि कांग्रेस को केवल 2 सीटें मिलीं। यानी कांग्रेस का प्रदर्शन निर्दलीयों से भी पीछे रहा।
अब कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को आत्ममंथन करना चाहिए, जब चुनाव बैलेट पेपर से हो और परिणाम भी सामने हो, तो हार का ठीकरा आखिर किस पर फोड़ा जाएगा?
शायद अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मुख्य चुनाव आयुक्त को बदलने की मांग करने के बजाय अपनी पार्टी के नेतृत्व, रणनीति और चुनावी संगठन में बदलाव की मांग करनी चाहिए। क्योंकि सवाल EVM का नहीं है, सवाल बैलेट का नहीं है…सवाल जनता के बीच कांग्रेस की स्वीकार्यता और उसके नेतृत्व पर भरोसे का है।