दशहरे पर मैंने अपनी पुरानी car बेचकर लाइफ की सबसे महंगी Luxury कार खरीदी,
पूरा परिवार खुश था, सब उसकी खूबियां गिना रहे थे,
पर उस चमचमाती गाड़ी को चलाते हुए भी मेरे अंदर एक खालीपन था, जिसने मेरी खुशियों का दम घोंट दिया था,
रात को जब इसकी असली वजह सामने आई, तो मेरा पूरा दिमाग हिल गया,
सालों corporate job मे दिन-रात की मेहनत के बाद,
आज दशहरे पर मैं अपनी Dream Car घर लाया,
Sunroof, लेदर इंटीरियर गाड़ी वाकई एक Beast थी,
उसे घर के सामने खड़ा देख पूरे परिवार के चेहरे पर जो खुशी थी,
उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता था,
आज जब हम सब पहली Long Drive पर निकले,
तो रास्ते भर फैमिली के सब लोग गाड़ी के premium फीचर्स और उसके smooth drive की तारीफें कर रहे थे,
मेरा सीना भी गर्व से चौड़ा हो रहा था कि चलो, आखिरकार life में कुछ बड़ा achive कर लिया,
लेकिन उस चमचमाती गाड़ी के स्टीयरिंग व्हील को पकड़े हुए भी मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी थी,
बाहर सब perfect था, पर अंदर एक गहरी घुटन महसूस हो रही थी,
एक ऐसी चीज़ जो इस इतनी बड़ी कामयाबी के दिन भी मेरा अंदर ही अंदर पीछा नहीं छोड़ रही थी,
गाड़ी जब वापस घर की parking में आकर रुकी, तो सब हंसते-मुस्कुराते अंदर चले गए,
पर मेरी आँखों के सामने क्रेडिट कार्ड के बिल,
बैंक लोन के पेपर्स और हर महीने कटने वाली भारी-भरकम EMI का वो अंतहीन जाल घूम रहा था,
इस लग्जरी को दिखाने के चक्कर में जो सिरदर्द मैंने मोल लिया था, उसकी चिंता मेरा दम घोंट रही थी,
दूर कोने में खड़े पापा यह सब देख रहे थे और वह सब समझ रहे थे,
भारी मन से जैसे ही घर के अंदर दाखिल हुआ, पापा ने मेरे कंधे पर हाथ रखा,
और एक ऐसी बात बताई... जिसने मेरी पूरी समझ ही बदल दी...2/1 👇
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