सियासत चमकाने के चक्कर में सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी खुद ही अपने बयानों के जाल में फंस गए🔥🔥
पहले हाथ उठाकर बाबा साहब की 22 प्रतिज्ञाएं लेते हैं, फिर सवाल उठने पर कहते हैं कि धर्म परिवर्तन का कोई इरादा ही नहीं था!
राजकुमार भाटी जी, अगर इरादा ही नहीं था तो सार्वजनिक मंच पर संकल्प लेने का दिखावा क्यों? और अगर प्रतिज्ञाएं सोच-समझकर ली थीं तो अब पीछे हटने की वजह क्या है?
बाबा साहब अंबेडकर के विचार कोई राजनीतिक प्रॉपर्टी नहीं हैं, जिनका इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से किया जाए। उनकी प्रतिज्ञाओं को पहले स्वीकार करना और फिर अपनी सुविधा के अनुसार पलट जाना, गंभीर सवाल खड़े करता है।
पहले प्रतिज्ञा, फिर सफाई और अब पलटी! सपा की इस सियासत पर जनता हंस रही है। बाबा साहब के नाम पर राजनीति करने वालों को कम से कम उनके विचारों के प्रति ईमानदार तो होना चाहिए 😏