मतलब देश के नायक इतने दिमाग से पैदल नहीं है जो इस झांट की बातों में आयेंगे
आवाज उठाकर देखो तुम्हारे आसपास सब कुछ बदलने लगेगा..
एक बातचीत में ध्रुव राठी ने शाहरुख खान, आमिर खान, अक्षय कुमार और तमाम दूसरे बड़े सेलिब्रिटीज से ये गंभीर सवाल उठाए।
अगर आप लोगों के अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठा सकते, अपने देश के लिए नहीं बोल सकते और आम नागरिकों की समस्याओं के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा सकते, तो फिर सेलिब्रिटी होने का मतलब ही क्या है?
क्या शोहरत और पैसा उन लोगों से ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं, जिन्होंने आपको स्टार बनाया?
ध्रुव राठी जैसे करोडों युवाओं को प्रोत्साहित करना हमारा धर्म है, जो रिटायर होने के बाद जेल जाने के डर से मीठी मौत का इंतेजार कर रहे हैं।
हम सबको युवाओं के साथ चार कदम चलना होगा उनका हौसला बढ़ाना होगा नये भारत के लिए।
जयहिंद