किसी की औकात नहीं थी कि उसको रोक पाए। अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को और उसकी पत्नी के साथ घर में आराम करते हुए रात में उठा लिया। और मैं आपको कहूँ, यही कोशिश भारत के साथ भी हो रही है और होती रहेगी।
आप लोग सोचेंगे कि यह कब हो गया और क्या हो रहा है, जरा विस्तार से बताइए?
आप सभी को याद है 2024 का वेनेजुएला में जो चुनाव था, वहाँ निकोलास मादुरो फिर से जीत गए। लेकिन पूरी दुनिया पर अपना अधिकार समझने वाले यू एस ओ को यह पचा नहीं। फिर वहाँ पर भी एक ट्रेंड चलाया गया—वोट चोरी।
यह कोई गल्प कथा नहीं है। न्यू यॉर्क टाइम्स का रिपोर्ट देख लीजिए, यह ब्लूमबर्ग का रिपोर्ट देख लीजिए, यह द गार्जियन का रिपोर्ट देख लीजिए... कुल मिलाकर पूरी दुनिया को बताने की कोशिश यह की गई कि यह जो इलेक्शन हुआ है, वह फ्रॉड था, डेमोक्रेसी खतरे में है और यहाँ पे डिक्टेटरशिप चल रही है, जिसकी डोर निकोलास मादुरो के पास है।
अब आपको यह स्टोरी सुनी-सुनी लग रही होगी। ध्यान से देखिए, मैं आपको याद दिला रही हूँ।
अब आपको याद है पाकिस्तान—इमरान खान ? आज कहाँ हैं ? जेल के पीछे। उनके लिए भी यही सारी स्टोरीलाइन बनाई गई—डिक्टेटरशिप, डिक्टेटरशिप, डिक्टेटरशिप।
जो अमेरिका को चाहिए था, वह मिल गया—उनके अनुकूल चलने वाली सरकार।
अब श्रीलंका पर आते हैं। वहाँ पर भी यही नरेटिव सेट किया गया और सरकार बदली गई।
अरे भाई! इतनी दूर जाने की जरूरत नहीं, एक साल पहले की बात करते हैं—बांग्लादेश, शेख हसीना। उनके लिए तो भारत के कुछ नियोजित था, जिन्होंने वीडियो बनाए कि वह डिक्टेटर हैं। और क्या हुआ ? सरकार बदली। और सरकार में किसको लाकर पदस्थ किया गया ? मोहम्मद यूनुस—नोबेल पीस विनर।
ऐसे ही वेनेजुएला में हुआ। विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को लास्ट ईयर नोबेल पीस प्राइस दिया गया। उनको पॉपुलर किया गया कि आने वाले समय में जब सरकार बदलेगी, तो इनके हाथ में सारी चीजें दी जाएँगी। आप समझ सकते हैं कि देश अलग अलग किंतु परिस्थितियां एक सी हैं। समूचे दक्षिण एशिया में अमेरिकी हस्तक्षेप की एक सी स्थिति है।
अब जरा गौर से समझिएगा। अगर यू एस ओ को अपना कंट्रोल एशिया में जमाना है, तो भारत में अपना चाटुकार पदस्थ करना पड़ेगा। आपको याद है, यहां एक एक कर कई सारे मुद्दे चलाए गए।
"मोदी डिक्टेटर हैं", "मोदी वोट चोर हैं", "चौकीदार चोर हैं", ई वी एम ( ई वी एम ) हैक हुआ, ऑपरेशन सिंदूर पर बातें उठाई गईं। यहाँ तक कि इंडियन इकॉनमी को डैड बोला गया।
जब भारत में इनके द्वारा पोषित और पालतू कुछ लोग इनके हिसाब से काम नहीं कर पाए, तो डोनाल्ड ट्रंप खुद सामने आए और उन्होंने टैरिफ का गेम खेला, 25 से 50% का टैरिफ लगाया।
"रशिया से तेल मत लो"... कुल मिलाकर रशिया से अपना संबंध समाप्त कर लो।
इसके बाद भी मोदी जी का दृढ़ निर्णय पीछे नहीं हटा। और मोदी जी अगर आज ऐसे खड़े हैं, तो हमारे-आपके वजह से, देश की करोड़ों करोड़ों राष्ट्रभक्त जनता के कारण वे कभी अपने निर्णय से नहीं डिगते। क्योंकि हम अपने देश के साथ खड़े हैं। आप बताइए कि किस कर्मचारी अथवा अधिकारी को तनख्वाह नहीं मिली। किस वृद्ध को पेंशन नहीं मिला। किस नागरिक को राशन नहीं मिला! जबकि भारत में कानून का राज है। यहां सरकार की सुरक्षा और संरक्षा है।
मैं बस इतना कहना चाहूंगी कि अगर थोड़ा सा भी आपको ये चीजें समझ में आई हों, तो बस यह मत देखिए कि वेनेजुएला में क्या हुआ है; आपको यह देखने की जरूरत है कि भारत के साथ क्या हो रहा है और हमें कैसे और अधिक सतर्क रहना है।
आनेवाले दिनों में माननीय मोदी जी को हटाने के लिए देश का विपक्ष और निचले स्तर पर जाएगा। नीचता की सारी हदें पार की जाएंगी । मेरी इस पोस्ट को बहुत अधिक शेयर करें ताकि लोग आने वाली परिस्थिति की मुकाबला कर सकें।
जय हिंद, जय भारत। भारत माता की जय।
डॉ सीमा मिश्रा के सौजन्य से।
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