अश्विनी कुमार से जुड़ा एक और किस्सा…
अश्विनी कुमार वही हैं जिन्होंने तीन साल पहले बतौर डिविज़नल कमिश्नर, दिल्ली के तत्कालीन मुख्यसचिव नरेश कुमार के बेटे का बचाव किया था, भ्रष्टाचार के मामले में!
फ़िलहाल इनके बेटे को एक महिला के साथ दुर्व्यवहार के मामले में दिल्ली पुलिस बचा रही है, ऐसा आरोप है पीड़िता की माँ का!
यानि नरेश कुमार के बेटे का बचाव अश्विनी कुमार करते हैं, और अब अश्विनी कुमार के बेटे का बचाव दिल्ली पुलिस कर रही है!
ग़ज़ब भाईचारा है दिल्ली की ब्यूरोक्रेसी में, भतीजों की “करतूतों” पर पर्दा अच्छे से डालते हैं!
नरेश कुमार के बेटे की कंपनी ने कुछ ज़मीन किसानों से ख़रीदी थी, जो कि द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए NHAI ने अधिग्रहित की।
मुआवज़े की जितनी राशि सरकार ने तय की, उससे कई गुना ज़्यादा पैसा इस कंपनी को देने का आदेश दिल्ली के एक DM ने बतौर अपीलेट अथॉरिटी दिया!
आरोप था कि संबंधित DM का आदेश नरेश कुमार, तत्कालीन मुख्य सचिव से प्रभावित था!
ये आरोप बेबुनियाद है, इसकी गवाही देने के लिए अश्विनी कुमार ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस की थी!
अमूमन कोई IAS अधिकारी अपने बॉस के बचाव में प्रेस कांफ्रेंस नहीं करता, पर अश्विनी कुमार ने किया!
नतीज़ा, भूमि अधिग्रहण में नरेश कुमार के बेटे की कंपनी को फ़ायद हुआ की नहीं, अगर हुआ तो उसमे नरेश कुमार की कोई भूमिका थी या नहीं, इसकी जाँच किसी एजेंसी ने नहीं की!
मामला दब गया, या यूँ कहिए दफ़न हो गया!
वक़्त बीता, कुछ महीने बाद अश्विनी कुमार MCD के कमिश्नर बना दिए गए। जून 2024 से फ़रवरी 2026 तक वो इस पद पर बने रहे।
अश्विनी कुमार के कार्यकाल में ही बीजेपी ने अप्रैल 2025 में फ़िर से जोड़तोड़ करके MCD में अपनी सरकार बना ली!
वैसे ये वही MCD है जिसे बीजेपी ने पिछले बीस सालों में भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है।
और ये वही MCD है जो अभी सत्य निकेतन में गिरी बिल्डिंग और उससे हुई सात छात्रों की मौत की ज़िम्मेदार है!
वैसे पिछले दो सालों में दिल्ली में बिल्डिंग गिरने की 34 घटनाएँ हो चुकी है, जिसमें 90 जानें गई हैं!
यानि अश्विनी कुमार जैसे अधिकारी अपने पद का इस्तेमाल सिर्फ़ ख़ुद के बेटे को बचाने के लिए करते हैं, न कि आम जनता के बेटे-बेटियों को सुरक्षित रखने के लिए!
शायद इसीलिए IAS को “स्टील फ्रेम ऑफ़ इंडिया” कहते हैं…