मेरे पिता जी का देहांत 2015 में हुआ था लेकिन वरासत कराने में मुझे 6 साल लग गये थे ,
क्योंकि जो भी लेखपाल साहब आते थे वो सब ईमानदार ही आते थे , अंत में रिश्वत देने के बाद ही वरासत हो पाया था।
अयोध्या के सोहावल तहसील के लेखपाल उत्कर्ष दीप को एंटी करप्शन ने पैमाइश के नाम पर 10 हजार रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा ,
जिसके बाद लेखपाल संघ धरना प्रदर्शन कर रहा हैं कि उसे रिहा किया जाए और पूर्व में जो भी ऐसे मामले हैं उसे खत्म किया जाए,
कुल मिलाकर इनकी मांग है कि रिश्वत को वैध घोषित कर दिया जाए,
आज के समय में कोई माई का लाल पैमाईश और वरासत बिना पैसे के करा कर देख ले,
गांव के लोगों में तो ये बात बैठ गई हैं कि जमीन की नापी के लिए 10 हजार लगते ही है , लोग इसे नॉर्मल मान चुके हैं।
वरासत के लिए रिश्वत आपकी जमीन कितनी है उसके हिसाब से तय होती हैं , जो 5 हजार से शुरू होकर लाखों तक भी जा सकती हैं।
सरकार को सभी प्रदर्शन करने वालों को बाहर फेंक देना चाहिए, देश में अभी बेरोजगार युवा है।
ये लोग संघ की आड़ में गलत लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अगला नंबर इनका न हो।